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Friday, 17 May 2019

भारत में गरीबी रेखा की गणना कैसे की जाती है

Asked By : Neha   ( Ynot App )

भारत में गरीबी रेखा की गणना कैसे की जाती है?
Options:

1) उनके घरों के इलाके से
2) बेरोजगारी की प्रकृति से
3) कैलोरी खपत से
4) शिक्षा के मानक से

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Answered By : Urmila (Top Voted)

Correct Answer: कैलोरी खपत से

गरीबी रेखा के आंकलन का पुराना फार्मूला वांछित कैलोरी आवश्यकता पर आधारित है। इसमें अनाज, दालें, सब्जियां, दूध, तेल, चीनी आदि वो खाद्य वस्तुएं शामिल थी जो जरूरतमंद कैलोरी प्रदान करते हैं। कैलोरी की जरूरत उम्र, लिंग और कार्य पर निर्भर करती है जो एक एक व्यक्ति करता है।

भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में औसत कैलोरी आवश्यकता 2400 कैलोरी, प्रति व्यक्ति प्रति दिन है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 2100 कैलोरी प्रति व्यक्ति प्रति दिन है। चूंकि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग स्वंय को ज्यादा शारीरिक कार्यों में व्यस्त रखते हैं इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में कैलोरी की आवश्यकताओं को शहरी क्षेत्रों की तुलना में अधिक रखा गया। इन गणनाओं के आधार पर, वर्ष 2000 में ग्रामीण क्षेत्रों में 328 रुपये प्रति माह और शहरी क्षेत्रों में 454 रुपये प्रति माह कमाने वाले मानक को गरीबी रेखा में शामिल किया गया था। इस तरह वर्ष 2000 में, ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले और 1,640 रुपये प्रति महीने से भी कम कमाई वाले पांच सदस्यों के एक परिवार को गरीबी रेखा के नीचे रखा गया।

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