Monday, 23 August 2021

Maratha Empire का पूरा इतिहास , शिवाजी का पूरा इतिहास , शिवाजी के दादा Maloji Raje Bhosle , जीजाबाई , गौरी महल ,Maldeo Rathore,( Ramchandra , Udai Singh , Chandrasen ), प्रतापगढ़ किला आदिल साहब , golconda,बीजापुर , शाहजी , पुणे के लाल महल , शिवाजी ने मराठा अंपायर की नीव , battle of pratapgadh , the battle of sacred pass, battle of pawan khind -1660,Sack of Surat, य battle of surat , 5 january 1664 ,Treaty of Purandar (1665),

 Maratha Empire                                                    
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(Marathas) मराठों का इतिहास युद्ध से भरा पड़ा है और अनगिनत युद्ध उन्होंने जीते कुछ तो उनके ऐसे राजा भी थे - जो कभी युद्ध हारे ही नहीं थे


सबसे पहले बात करते हैं उस समय मराठा साम्राज्य की नींव पड़ने से भी पहले

 



अकबर के समय


मुगलों  ने अनेक हिंदू राजाओं से संधि करके मुगल साम्राज्य का विस्तार कर लिया था फिर अकबर के बाद के वंशज खलीफा के आदेश में  इस्लामीकरण  तथा जजिया टैक्स हिंदुओं पर अपने अपने क्षेत्र अधिकार में तथा मंदिरों  को तोड़ा  जाना , जबरन इस्लाम कबूल करवाना आदि शामिल था


मुगलों के इस नियत के कारण उनके ऊपर हमेशा विरोध होता था  पर यह बहुत सीमित था लेकिन जब औरंगजेब का शासनकाल आया 

 


तो उसने जजिया टैक्स को पूरे जगह लागू कर दिया तथा मंदिरों को तोड़ जाना बहुत व्यापक रूप से होने लगा अथवा शहरों के नाम बदलना और गैर मुस्लिम राजाओं को आक्रमण करना और लोगों को जबरन इस्लाम कबूल करवाना अन्यथा मरवा देना बहुत तेज हो गया था |


औरंगजेब उस समय खलीफा के अधीन था और उसे बाहरी इस्लामिक देशों से भी खूब मदद प्राप्त थी (खलीफा वह होता है जो पूरे इस्लाम को कंट्रोल  करते हैं उस समय)


और भारत में अनेक मुगल राजाओं की वंशज ही पूरे भारत में छोटे-छोटे राज्य बनाकर शासन कर रहे थे और वह सब औरंगजेब के अधीन थे इसलिए मुगलों की ताकत बहुत अधिक हो चुकी थी



शिवाजी के दादा  Maloji Raje Bhosle 


पहले सिंदखेड  के जादव (Jadhavs of Sindkhed )

सेना में थे और यह जादव सेना अहमदनगर सल्तनत को अपनी सेना मुहैया करवाया करती थी |


Maloji Raje की शादी uma bai से हुई थी 



और उनके दो पुत्र हुए शाहजी और शरीफ जी



एक बार होली के त्योहार में - जाधव आर्मी के चीफ

Lakhuji ने Maloji Raje जी के बेटे शाह जी के साथ अपनी बेटी जीजाबाई की शादी का प्रस्ताव रखा और 

Maloji Raje जी स्वीकार कर लिया

इस तरह से शाह की शादी जीजाबाई से हुई |



Maloji Raje के दूसरे बेटे भाई के बारे में ज्यादा इंफॉर्मेशन नहीं मिलती


Maloji Raje और उनके भाई Vithoji को एक बार खेतों में कहीं खजाना मिल गया जिससे वह अमीर हो गए और उन्होंने अपने एक छोटी सी सेना का निर्माण किया |


फिर 1577, मै Maloji Raje के दोनों पुत्रों ने अहमदनगर सल्तनत को ज्वाइन कर लिया और वह वहां के मुख्य प्रधानमंत्री Malik Amber के बहुत करीब हो गए 


मलोजीराजे ने मालिक अंबर का साथ दिया मुगलों के खिलाफ कई युद्ध लड़ने में |




 जिस कारण अहमदनगर के निजाम ने उन्हें राजा का पद दिया और पुणे आदि शहर का उन्हें जागीर बना दिया


फिर एक युद्ध में उनकी मृत्यु के बाद उनकी जगह शाह जी ने ले ली



यहां पर याद रहे शाह जी की बेटे शिवाजी और उनकी पत्नी आदि रहने लगे थे और यह पूरा उनके नियंत्रण में था



कुछ वर्षों बाद शाहजहां मुगलों के नए राजा बने थे



 तो उन्होंने राजा बनने के बाद अहमदनगर पर आक्रमण करने के आदेश दिया 


( शाहजी और बीजापुर के  सेना साथ  मिलकर)  और मुगलों के बीच युद्ध हुआ इसमें कुछ हिस्सा मुगलों ने जीत लिया लेकिन शाहजी को बिजापुर के बड़े सैन्य अधिकारी बना दिए गए



बीजापुर और मुगलों के बीच शांति की संधि होने के बाद मुगलों की सपोर्ट से bijapur ने विजयनगर एंपायर के   मैसूर तथा बेंगलुरु पर आक्रमण किया और उस पर अपना कब्जा कर लिया 




लेकिन बेंगलुरु पर नियंत्रण शाहजी को दे दिया हालांकि शाहजी ने बेंगलुरु में अपना कंट्रोल कर लिया 


धीरे-धीरे बेंगलुरु पूरा शाहजी के ही नियंत्रण में आ चुका था और बीजापुर से उसका कंट्रोल पूरी तरह से खत्म हो गया था




 शाहजी ने बेंगलुरु के सुंदर करण करने के लिए अनेकों gardens बनवाए तथा  प्रसिद्ध गौरी महल  भी बनवाया ं




इसी बीच जीजाबाई ने   pune मैं बेटे शिवाजी की शादी Saibai ( Nimbalkar) से तय कर दी,  हालांकि अभी दोनों की ही उम्र 19 -20 वर्ष के आसपास ही थी



यह शादी पुणे के लाल महल में  16 may 1640      संपन्न हुई थी. 



इसके बाद शाह जी का बेटा शिवाजी और शाह जी की पत्नी जीजाबाई कुछ समय के लिए बेंगलुरु आए और फिर वह पुणे लौट गए


और शाह जी.  बड़े बेटे शंभू जी और दूसरी पत्नी के बेटे इकोजी - उनके साथ बेंगलुरु में ही रहे


 एक युद्ध के दौरान bijapur के विरुद्ध  लड़ते हुए शाह जी.  के बेटे शंभू जी की मृत्यु हो गई |  इसमें शंभू जी को अफजल खान ने ही मारा था |


व दूसरे बेटे Venkoji   जिसे ekoji के नाम से भी जाना जाता था जो दूसरी पत्नी के बेटे थे को Thanjavur में  बीजापुर के सुल्तान आदिल शाह ने ही उसे वहां पर भेज   दिया |



बाद में उसने वहां पर वहां के राजा को हराकर उसे अपने नियंत्रण में कर लिया था और वह तभी से वहीं पर शासन करने लगा था |


वही बीजापुर दो हिस्सों में में बट गए थे 



कुछ बीजापुर की मुस्लिम शासक चाहते थी कि वह मुगलों से अच्छे रिश्ते बनाकर रखें क्योंकि वह मुस्लिम है वही कुछ चाहते थे कि मुगलों का इधर कोई अस्तित्व ना रहे 


लेकिन आखिर कर जो मुगलों से रिश्ते बना कर चलना चाहते थे धर्म के आधार पर उनका पक्ष भी ज्यादा भारी था और उन्होंने मुगलों के साथ संधि कर ली  |


शिवाजी की अभी उम्र महज 15 साल की थी उन्होंने




फिर एक बार जब बीजापुर के सुल्तान ने विजय नगर में हमला करने का प्रयास किया तो - उसके विरुद्ध शाह जी के बेटे शिवाजी लड़े 



जिसके कारण शाहजी  को बंदी तक बना लिया गया हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया क्या कुछ शर्तों में जिसमें



 

उन्हें जंजीरों से बांधकर लाया गया और काफी समय तक उन्हें बंदी बनाकर रखा जोकि बाद में उन्हें रिहा इन शर्तों में किया की

 उनके पास जो किले थे ( Kondana और Bangalore  के ) वह उनको उनके पास लौटाने पड़े


Kondana 


Bangalore 




बेंगलुरु छोड़ने के बाद अपनी दूसरी पत्नी के बेटे Venkoji   जिसे ekoji के नाम से भी जाना जाता था के पास चले गए




 वह उस समय Thanjavur मैं राज कर रहा था 




एक बात याद रखें शाहजी एक रणनीति में काम कर रहे थे जिससे वह चाहते थे की स्वतंत्र राज वह बना सकें अपने बेटों के साथ मिलकर





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उसी समय शिवाजी 



पुणे से bijapur के खिलाफ निरंतर युद्ध और किलो को अपने कब्जे में कर करने के अभियान चलाते रहते थे

और उन्होंने बीजापुर के कई जिले अपने नियंत्रण में ले लिया


जिनमें मुख्य थे राजगढ़ का किला

 


जहां आगे चलकर शिवाजी की पत्नी हमेशा के लिए रहती थी और वही उनकी मृत्यु हुई थी


 तथा इसके बाद 1656 मैं - शिवाजी ने मराठा अंपायर की नीव महाराष्ट्र के 1 गांव 

jawali के राजा था Chandraraoji More को हरा कर रायगढ़ फोर्ट को अपने कब्जे में लेकर किया था


Chandraraoji More उस समय बीजापुर के सुल्तान आदिलशाह के अधीन थे और जवाली गांव बीजापुर के सल्तनत में आता था जिसे आज Mahabaleshwaram कहा जाता है |





फिर Raigarh fort को और मजबूत और बड़ा बनवाया


इस रायगढ़ fort मैं किसी को भी पहुंचने के लिए हमेशा 2 गांव से गुजरना पड़ता था - Pachad & Raigadwadi और यह ford पहाड़ों की ऊंचाई पर बना है |

रायगढ़ पहुंचने के लिए मुख्य गांव Pachad था


शिवाजी इस गांव में हमेशा 10, 000 सैनिक तत्पर तैयार रखते थे , किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए





उसके बाद शिवाजी




फिर  1659 मै - बीजापुर के सुल्तान ने अफजल खान को शिवाजी से युद्ध करने के लिए भेजा अपनी बहुत बड़ी  सेना  के साथ


शिवाजी के पास सैनिक बहुत कम थे अफजल खान के मुकाबले में - लेकिन शिवाजी ने अपनी कुशल रणनीति और पराक्रम से अफजल खान को इस युद्ध में हरा दिया

और इसमें अफजलखान मारा गया



 इस युद्ध को

 बैटल ऑफ प्रतापगढ ,( battle of pratapgadh 10 Nov 1659 )  के नाम से जाना  जाता  हैं 


यह महाराष्ट्र में satara मैं प्रतापगढ़ किले 

के पास हुआ था


battle of pratapgadh  बहुत चर्चित युद्ध है इस युद्ध के बारे में थोड़ा सा जानते हैं

एक तो यह कि इसमें बीजापुर की तरफ से अफजल खान नेतृत्व कर रहे थे और यह वही अफजलखान थे जिन्होंने शिवाजी के बड़े भाई शंभू जी को एक युद्ध में मार दिया था




युद्ध से पहले अफजल खान ने , Tulja Bhavani Temple 


 जिसकी शिवाजी की फैमिली बहुत पूजा करती थी , तथा Vithoba temple at Pandharpur

जो कि हिंदुओं के लिए बहुत बड़ा आस्था का केंद्र हुआ करता था - उसको नष्ट करवा दिया



 अफजल खान ने करीब 2 महीने तक प्रतापगढ़ के पूरे किलो को चारों तरफ से घेर लिया था,  जिसे शिवाजी उस गिराओ को नहीं तोड़ पा रहे थे

लेकिन अफजल खान भी किले पर आगे बढ़त बनाने में असफल हो रहा था - और शिवाजी की सेना ने प्रतापगढ़ किले के चारों तरफ से अफजल खान की सेना को आगे नहीं बढ़ने दे रहे थे



फिर एक संधि हुई कि अफजल खान और शिवाजी दोनों समझौते के लिए एक झोपड़ी पर बिना हथियारों से के साथ मिले 


 अफजल खान ने पूरा प्लान बनाया था -  जब दोनों मिलेंगे तो वह शिवाजी को वहीं पर दबोच लेगा और उसे अपने खंजर से मार देगा 


शिवाजी को पहले से ही शक था - या तो यह उसको मारने का प्लान बना रहा है  , या फिर उसने कहीं पर बहुत सी छोटी सी सेना छुपा रखी है  | इसलिए शिवाजी ने भी पूरी तैयारी कर रखी थी |


दोनों ओर से 10 -10  सैनिक उस समय कुछ दूरियों  बनाए रखेंगे और  उनके साथ उपस्थित रहेंगे



जब शिवाजी और अफजल खान एक झोपड़ी में मिले 


अफजल खान ने उसे दबोचने की कोशिश करी. और उसे अपने खंजर से मारने की कोशिश की


उसके इस वार को रोकने के लिए 

शिवाजी ने अपनी छोटी सी खंजर जो छुपा रखा था 

निकाला और उसके वार को रोका फिर शिवाजी ने

अपनी खंजर ,  अफजल खान के पेट में मार दिया 



जिससे अफजल खान शरीर से खून निकलने लगा 


उसके बाद तुरंत ही अफजल खान के बॉडीगार्ड  bada sayed जैसे ही शिवाजी के ऊपर अपनी तलवार से हमला करने के आगे बढ़ा तभी jiva mahala जोकि शिवाजी का बॉडीगार्ड है उसने उसे वहीं पर मार दिया


जैसी ही afjal खान अपनी सेना की तरफ भागने लगा

सभी शिवाजी की सेना से Sambhaji Kavji Kondhalkar  अफजल खान को पकड़ कर उसका सर - धड़ से अलग कर दिया



बाद में इसी सर को राजगढ़ ले जाया गया और रानी जीजाबाई को दिखाया गया क्योंकि अफजल खान ने शाहजी की बेज्जती करी थी तथा संभाजी ( शिवाजी के बड़े भाई ) की मृत्यु करने में शामिल था


फिर शिवाजी अपने किले की तरफ वापस जल्दी से जाने लगे और अपनी सेना को इशारा कर दिया आक्रमण करने के लिए |


और इसके बाद मराठा सैनिकों के अचानक से वार से आदिलशाही की सेना बुरी तरह से हारने लगी और पीछे की तरफ भागने लगे |


इस बीच रास्ते में 23 किले जो कि आदिलशाही 



के थे उन सभी पर शिवाजी ने कब्जा कर लिया


इनमें मुख्य किले थे - Konkan 


, kolhapur 




और 

panhala ,







यहां तक की कोल्हापुर किले को मराठा को आदिलशाही के किलेदार ने डर के मारे सौंप दिया था




यहां पर एक बात और भी हुई थी की ईस्ट इंडिया कंपनी की Qeen का letter  

अफजल खान को आया था जिसमें उसने अफजल खान को सलाह दी थी की शिवाजी को हराने के लिए तुम उससे दोस्ती का नाटक करो क्योंकि सिर्फ सैनिकों से तुम उनसे युद्ध नहीं जीत सकते  |

यहां से पता चलता है - उस समय ब्रिटिश पूरा सपोर्ट करती थी मुगल सल्तनत को


यहीं से मराठा अंपायर का डंका बजने लगा 



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फिर  1660  - आदिल शाह ने मुगलों के साथ मिलकर शिवाजी को नॉर्थ और साउथ दोनों तरफ एक साथ आक्रमण करने का प्लान बनाया


उस समय शिवाजी - panhala के किले में अपने सैनिकों के साथ थे |


आदिल शाह की तरफ से जनरल Siddi Jauhar

 ने पन्हाला किले को चारों तरफ से घेर लिया था और उसने खूब बम बारूद से किले पर हमला किया


यह बम बारूद उसको ब्रिटिश ने मोहिया करवाया था |

और राजापुर के ब्रिटिश सैनिक भी उनके साथ शामिल थे



शिवाजी को जब यह पता चला कि इसमें राजापुर की ब्रिटिश लोग भी शामिल है तो वह बहुत क्रोधित हो गए और उन्होंने राजापुर की ब्रिटिश फैक्ट्री 

को आग लगा दी थी तथा उनके बहुत से लोगों को तीन चार साल के लिए कैदी बनाकर अपने पास रखा था



महीने तक इस चले इस युद्ध को - शिवाजी के पास चारों तरफ से मदद आनी बंद हो गई थी 


तभी शिवाजी ने    Vishalgadh के किले तक जाने का  प्लान बनाया

वही विशालगढ़ के किले को muhgal सेना  ने चारों तरफ से घेर रखा था




शिवाजी ने करीब 6 महीने तक इंतजार किया तब तक आदिलशाही की सेना का खाने की सामग्री वगैरह खत्म ना हो जाए


जैसी शिवाजी को सूचना मिली की उनकी खाने की सामग्री खत्म हो रही है उनको दोबारा से  खाने की  सामग्री का इंतजाम करना होगा 


 तभी शिवाजी ने panhala से निकलकर विशालगढ़ जाने  के plan  पर अमल करने  की सोची



प्लेन यह था कि शिवाजी अपने को 600 योद्धाओं के साथ पहाड़ के चढ़ते हुए वह किले के बाहर से चले जाएंगे और वही शिवाजी का वेश धारण करके उनकी सेना में Shiva Kashid, 

अपने आप को बंदी बनवा लेंगे , जिससे उनको काफी समय मिल जाएगा विशालगढ़ तक पहुंचने के लिए



Shiva Kashid ,  शिवाजी के रूप में बंदी तो जरूर बना लेकिन आदिलशाह के जनरल Siddi Jauhar 

जोर को उसे पहचानने में समय नहीं लगा और फिर उन्होंने 10,00 सैनिकों  के साथ शिवाजी का पीछा करना शुरू कर दिया


शिवाजी को इस बात का एहसास था की पीछा कर रही आदिलशाह की सेना और Mughal  की सेना का एक साथ सामना करना असंभव है



शिवाजी के पास बस एक ही ऑप्शन था कि वह उसकी 600 लोगों में से कुछ लोग आदिल शाह की विशाल सेना को रोके और कुछ लोग विशालगढ़ की तरफ चलते रहें



Baji Prabhu Deshpande 

और कुछ 300 सिपाहियों ने निश्चय किया कि वह रुक कर  पीछा कर रही है Adil shah की सेना का सामना करेंगे


 और उन्हें बताया गया कि अगर शिवाजी सुरक्षित विशालगढ़ के किले में पहुंच जाते हैं तो वहां से तोप का गोला फायर होगा - एक संकेत के रूप में



पीछा कर रही Adil shah  की सेना को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण जगह.Ghod Khind  



जो कि दो चट्टानों के बीच , आर - पार होने के लिए ,  बहुत ही कम जगह थी |



Baji Prabhu Deshpande और उनके साथियों ने आदिलशाही की सेना को तब तक रोक रखा जब तक उन्हें विशालगढ़ से तोप का सिग्नल नहीं मिला , मुट्ठी भर सैनिकों ने करीब एक हजार से ज्यादा आदिल शाह की सेना जो Ghod Khind को पार करना चाहती थी उन सभी को मार दिया 


यह युद्ध करीब 5- 6 घंटे तक चलता रहा


वही शिवाजी को विशालगढ़ में दाखिल होने से पहले मुगलों की सेना को सामना करना पड़ा |


स्वयं शिवाजी अपने दोनों हाथ में तलवार लेकर लड़े यह देखकर विशालगढ़ कि तरफ से शिवाजी को तुरंत सुरक्षा के लिए सेना भेजी गई - जिससे शिवाजी विशालगढ़ के अंदर जल्द आसानी से दाखिल हो गए 


विशालगढ़ से आखिर कर तोप से इशारा दिया गया


वही  Baji Prabhu Deshpande और उनकी कुछ सेना अभी भी आदिल shah के सैनिकों को रुके हुए थे और उन से निरंतर युद्ध लड़ रहे थे 

लेकिन धीरे-धीरे और सब समाप्त हो गए

.

plan के तहत बिल्कुल नई सेना तैयार की थी जो बाद में मुगलों और आदिल शाह की सेना पर टूट पड़े और और उनको बहुत भारी तबाही मचाई तथा उन को हरा दिया



शिवाजी konkan के इलाके से होते हुए - अपने सबसे सुरक्षित किले रायगढ़ पहुंच गए



शिवाजी बाद मे Baji Prabhu के घर जो कि रायगढ़ में ही था 


पहुंचे उनके परिवार से मिले और उनके बड़े बेटे को अपनी सेना के उच्च सेना अधिकारी बना दिया साथ  ही Ghod Khind का नाम बदलकर pavan  Khind रख दिया


 जिसका का मराठी में अर्थ होता है पवित्र दर्रे की लड़ाई

यानी the battle of sacred pass



और इस लड़ाई को battle of pawan khind -1660

  के नाम से जाना जाता है



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इसके बाद कुछ ही महीनों में बीजापुर की बड़ी बेगम 

ने शिवाजी पर फिर आक्रमण का प्लान बनाया


इसके लिए उसने औरंगजेब को भी संदेश पहुंचाया जिसके जवाब में औरंगजेब ने अपने uncle Shaista Khan की अगुवाई में 

डेढ़ लाख मुगल सैनिक तथा बहुत बड़ी संख्या में  तोपे , बारूद के साथ भेजा |

मुगलों की सेना को तुर्क , उज़्बेकिस्तान आदि से भी सहायता और सैनिक मिला करते थे |



Shaista Khan ने बीजापुर की सेना के साथ मिलकर पूरे पुणे सिटी को चारों तरफ से बंदी बना लिया और मराठों के आने जाने पर सख्त पहरा बिछा दिया |


Shaista Khan और बीजापुर कि. इस बहुत बड़ी सेना का मराठों को सामना करना असंभव था |



Shaista Khan अपने बेटे और बहुत सारी पत्नियों के साथ पुणे के लाल महल में आश्रय ले लिया था


 यह वही लाल महल था जिसमें शिवाजी का पूरा बचपन बीता था - यहां तक कि उसकी शादी भी हुई थी 


 जब शिवाजी ने Torna fort in 1645 अपने कब्जे में ले लिया था तभी लाल महल को उन्होंने छोड़ दिया था



5 April 1663 मैं एक शादी समारोह का सहारा लेकर शिवाजी अपने 400 मराठा सैनिक लेकर और भेष बदलकर. उसमें शामिल हो गए और वह पुणे में दाखिल हो गए


 वहीं कुछ मराठा सैनिक मजदूर वगैरा आदि बनकर पुणे में दाखिल हो गए 



आधी रात में उन्होंने लाल महल पर हमला किया जिससे Shaista Khan की निगरानी कर रहे हैं उसके स्वयं के बेटे की मृत्यु हो गई तथा उसकी सभी पत्नियों की भी मृत्यु हो गई 




साथ ही जब Shaista Khan , लाल महल की बालकनी से  भागने की कोशिश किया तो शिवाजी ने उसकी उंगलियां काट दी |


और फिर रात का सहारा लेकर मराठा सेना ,  शिवाजी के साथ गायब हो गए |



जब औरंगजेब को यह पता चला Shaista Khan करण की साथ यह सब  हुआ जबकि उसके पास बहुत ज्यादा बड़ी विशाल सेना थी |


इस शर्म के मारे औरंगजेब ने उसका तबादला बंगाल कर दिया था |


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मुगलों द्वारा Shaista Khan कि इस अचानक से अटैक का बदला लेने के लिए शिवाजी ने मुगलों पर अटैक करने का plan  बनाया



सूरत का बंदरगाह 



उस समय मुगल और ब्रिटिश के लिए व्यापार का बहुत बड़ा केंद्र था और इसकी पूरी निगरानी

मुगल के सेनापति Inayat Khan द्वारा की जाती थी


January 5, 1664, शिवाजी ने इसी बंदरगाह पर हमला किया 

अचानक हुए इस हमले से Inayat Khan डर कर सूरत के किले में छिप गया

शिवाजी ने महापुर मुगलों का काफी नुकसान किया यहां तक कि उनकी जहाजों को आग लगा दी


शिवाजी 6 दिन तक इस व्यापारी बंदरगाह से मुगलों की सोना चांदी संपत्ति अधि लूट लूट कर रायगढ़ किले ले जाते रहे |

शिवाजी के इस अटैक को Sack of Surat, य battle  of  surat ,  5 january 1664  भी कहा जाता है



शिवाजी के इस अटैक से औरंगजेब बोखला गए

फिर उन्होंने जय सिंह को बड़ी विशाल सेना के साथ शिवाजी के विरुद्ध भेजा , 


जयसिंह ने पुरंदर किले जहां पर शिवाजी थे वहां तक पहुंच गए


इस बीज जय सिंह ने कई किलो पर अपना कब्जा कर लिया था तथा बहुत से मराठा सैनिकों को बंदी बना लिया था


जयसिंह ने शिवाजी के सामने प्रस्ताव रखा और बातचीत करने के लिए बुलाया


 शिवाजी जान चुके थे  की मुगलों से इस समय युद्ध करने से उनके ही अपने ही लोग लोग क ज्यादा नुकसान होगा


जय सिंह मानसिंह के ही वंशज थे तथा मानसिंह


राजा Bhagawant Das के पुत्र और Bhagawant Das 


राजा Bharmal के पुत्र थे जिन्होंने अपनी बेटी जोधा बाई की शादी अकबर से की थी - जिनका पुत्र जहांगीर था. | 


बाद में राजा मानसिंह की भी शादी Bibi Mubarak से हुई थी जो कि अकबर के चचेरे भाई की  बेटी थी |




यह राजपूत परिवार हमेशा मुगलों के लिए वफादार रहा और मुगलों का विस्तार करने में बहुत बड़ा योगदान रहा |


यहां तक कि राजा मानसिंह को अकबर के नवरत्नों में से एक माना जाता था



.


शिवाजी को लगा कि अगर अपनी एक टुकड़ी हम युद्ध में छोड़कर चले जाएंगे तो नुकसान उनकी ही सेना का होगा


शिवाजी , जय सिंह के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और संधि के लिए वह किले से बाहर आए |


इस संधि को : Treaty of Purandar (1665)

के नाम से भी जाना जाता है


इसके तहत शिवाजी को 23 किले औरंगजेब के हवाले करने  होंगे तथा

तथा अगर शिवाजी की मुगलों को जहां पर भी जरूरत पड़ेगी - मुगल सल्तनत की मदद करनी पड़ेगी


अगर शिवाजी को बीजापुर में अपना आधिपत्य कायम करना है तो उन्हें 4  lakh hun - एक तरह की सोने की मुद्राए - मुगल सल्तनत को देनी पड़ेगी




इन सब शर्तों को स्वीकार करके आगे की बातचीत के लिए वह औरंगजेब के पास आगरा जाने के लिए राजी हो गए




फिर 1666 मैं औरंगजेब के बुलाने पर शिवाजी आगरा पहुंचे | वह अपने साथ संभाजी को भी ले गए जिनकी उम्र उस समय सिर्फ 9 वर्ष की थी



औरंगजेब का प्लान उन्हें कंधार ( जो अफगानिस्तान में है ) वहां पर भेजने का था ताकि वहां पर दुश्मनों  के खिलाफ मुगलों का नेतृत्व करें 


औरंगजेब उन्हें अपने जनरल्स के पीछे खड़े होने को कहा जिसे  शिवाजी ने इंकार कर दिया

शिवाजी ने औरंगजेब को उन्हीं के दरबार में काफी कुछ सुनाया   ,जिससे बोखला कर औरंगजेब ने उसे कैद करवा दिया


हालांकि औरंगजेब उस समय बहुत ज्यादा विवश थे  क्योंकि शिवाजी को राजपूतों का उस समय सपोर्ट था



शिवाजी ने अपने और अपने बेटों को एक मिठाई के बड़े से basket में छुपा कर किसी तरह से वहां से फरार हो गए |

यह मिठाई उस समय किसी त्योहारों में बांटी  जाने के लिए बाहर जा रही थी |





औरंगजेब को जय सिंह के बेटे राम सिंह पर शक था इसलिए उसने उसे सभी पदों से हटा दिया तथा उसकी जागीर भी अपने कब्जे में ले  ली


राम सिंह उस समय आमेर जो कि आज इस्लामाबाद है  उसके  राजा हुआ करते थे , उसे मुगलों ने अपने अधीन कर लिया 



फिर राजा जसवंत सिंह ने मुगलों और मराठों में संधि करवाएं जिससे के बाद औरंगजेब ने शिवाजी को राजा मान लिया और जो संधि की शर्ते पहले थी वह लागू हो गई


जसवंत सिंह राठौर राजा थे और इनके पूर्वज थे

Maldeo Rathore जोकि मारवाड़ जिसे आज जोधपुर कहते हैं वहां के राजा थे 

उनके मरने के बाद उनके 3 पुत्र 

( Ramchandra , Udai Singh , Chandrasen ) 




 मैं आपस में विवाद हो गया क्योंकि मरने से पहले मालदेव बने अपने सबसे छोटे बेटे Chandrasen को राजा बना दिया था बड़े बेटे की बजाएं



 श्री रामचंद्र और Udai Singh मिलकर आक्रमण किया चंद सेन पर 


इसमें Chandrasen ने दोनों को पराजित कर दिया


रामचंद्र ने अकबर की मदद से चंद्रसेन को पराजित किया और जब अकबर को यह पता चला अकबर ने जोधपुर पर अपना आधिपत्य कायम कर दिया


चंद्रसेन उदयपुर के राजा उदय सिंह राणा की बेटी की शादी करके फिर से अपने आप को मजबूत किया और अपने मरने के दम तक वह मुगलों के खिलाफ लड़ता रहे |



 लेकिन बाद में अकबर ने Udai Singh जो चंद्रसेन का भाई था  को वहां का राजा बना दिया क्योंकि उदय सिंह ने चंद्रसेन के बारे में सारी जानकारी अकबर को दी थी


हालांकि इसके बदले में उधर सिंह ने अपनी बेटी Jagat Gosain की शादी अकबर के बेटे जहांगीर से की थी और शाहजहां इन्हीं का पुत्र था


उदय सिंह ने जब अपनी बेटी की शादी जहांगीर से की थी 


इसके विरोध में बहुत से राजपूत राजा आए थे जिनमें प्रमुख के थे कल्याण दास 


कल्याण दास ने उदय सिंह को मारने के लिए कई बार प्रयत्न किए 


 लेकिन उदय सिंह अकबर की मदद से कल्याण दास को एक युद्ध में मार दिया


उदयसिंह की मृत्यु के बाद उनका बेटा राजा सूर सिंह मारवाड़ के राजा बने


 फिर उनका बेटा राजा गज सिंह राठौर ने जोधपुर यानी मारवाड़ की कमान संभाली

और उनकी मृत्यु के बाद जसवंत सिंह वहां के राजा बने

और यह हमेशा मुगल के पक्ष में लड़ते रहे





जसवंत सिंह द्वारा जब शिवाजी और औरंगजेब  के बीच संधि हो गई तब एक-दो वर्षों तक मुगल और मराठों में कोई युद्ध नहीं हुआ |



और औरंगजेब और शिवाजी दोनों ने मिलकर बीजापुर पर बढ़त बना रहे थे |






औरंगजेब की 5 बेटे थे 

पहला बेटा था - Muhammed Sultan , 


दूसरा था - Muazzam या कहें Shah Alam या कहें BahadurShah first


तीसरा बेटा था - Azam Shah


चौथा बेटा था - Muhammad Akbar


और वही पांचवा बेटा था - Kambaksh



Muhammed Sultan और Muazzam या कहें BahadurShah first 

Nawab Bai के पुत्र थे और औरंगजेब  का Nawab Bai के प्रति लगाओ बहुत कम था तथा वह काफी समय अलग अलग  ही रहे थे |



1652 मैं जब मराठा अंपायर की  नीव भी नहीं पढ़ी थी 

तब शाहजहां ने औरंगजेब को मुगलों का गवर्नर बनाकर golconda 



पर कब्जा करने के लिए भेजा था लेकिन golconda का राजा ,  उसमें औरंगजेब के बड़े  बेटे Muhammed Sultan  के ससुर थे और उसने ने औरंगजेब यानी अपने ही पिता के खिलाफ मोर्चा संभाला था


इससे नाराज होकर औरंगजेब ने उसे कैद करवा दिया था | और फिर कुछ सालों में उसकी मृत्यु हो गई थी




और शिवाजी को पता था की Muazzam  य

BahadurShah first  किसी भी तरह से औरंगजेब को हटाकर खुद को स्थापित करना चाहता था





इसी बीच शिवाजी ने अपने जनरल प्रतापराव के साथ संभाजी को औरंगजेब के दूसरे बेटे के पास भेजा |




जब औरंगजेब को पता चला की


इसी से विवश होकर शिवाजी को प्रतापगढ़ किला आदिल साहब को वापस करना पड़ा और दोनों में संधि हुई लेकिन बाद में 1673 में शिवाजी ने इस किलो को फिर अपने कब्जे में कर लिया था


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बीजापुर और शिवाजी में संधि कराने के लिए शाह जी आए पुणे आए यह शिवाजी के साथ उनकी 12 साल बाद मुलाकात हुई थी और इसके बाद 4जी का एक शिकार में गए थे और वहां घोड़े से गिरक हादसे में  

1664 मृत्यु हो गई थी

शिवाजी के दादा Maloji Raje Bhosle पहले 

Ahmadnagar Sultanate (Nizam Shahi ) dynasty (1490–1636) जो कि 1490 से लेकर 1636 तक थी - उसके उच्च सेना अधिकारी थे |

उन्हें इसके बदले में जमीन क बड़ा हिस्सा दिया जाता था |






बाद में इसे मुगलों राजा शाहजहां ने इस पर आक्रमण करके उसको अपने अधीन कर लिया था वहां से मैं लॉजी को फिर बाजीर बाजीराव
28 May कि सेना में ही थे |






उन्होंने अपने पुत्र के लिए एक किले का निर्माण भी करवाया था  -Ahmednagar  मैं




यह औरंगजेब से पहले का काल था फिर उसके पुत्र शाह जी भी जी सेना में थे




शिवाजी ने मराठा अंपायर की नीव महाराष्ट्र के 1 गांव 

jawali के राजा था Chandraraoji More को हरा कर रायगढ़ फोर्ट को अपने कब्जे में लेकर किया था


फिर Raigarh fort को और मजबूत और बड़ा बनवाया


इस रायगढ़ fort मैं किसी को भी पहुंचने के लिए हमेशा 2 गांव से गुजरना पड़ता था - Pachad & Raigadwadi और यह ford पहाड़ों की ऊंचाई पर बना है |

रायगढ़ पहुंचने के लिए मुख्य गांव Pachad था


शिवाजी इस गांव में हमेशा 10, 000 सैनिक तत्पर तैयार रखते थे , किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए



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