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Tuesday, 19 November 2019

Institute (competition, school coatching , english coaching , language learning) को कैसे स्टार्ट करें और उसमें आने वाली सभी प्रकार की प्रॉब्लम्स और मार्केटिंग कैसे करें

Instituste Business (competition, school coatching , english coaching , language learning)



इंस्टिट्यूट बिजनेस शुरू करते समय क्या  दिक्कतें आती है और अगर आपके पास लागत (expense) कम हो तो किन किन बातों का ध्यान से ध्यान रखना चाहिए |



इंस्टिट्यूट शुरू करने से पहले आप यह मत देखिए पहले की इंस्टिट्यूट में  बच्चों की संख्या कितनी है क्योंकि वह बहुत पहले से हैं इसलिए आज वह हमेशा संख्या में ज्यादा रहेंगे पर जैसे-जैसे समय बदल रहा है पढ़ाई करने के और समझाने के तरीके बदल रहे हैं |

आपको यह देखना है कि आप किसी एक सब्जेक्ट (subject)  विषय मैं ऐसा क्या बेहतर कर सकते हो जो अन्य इंस्टिट्यूट नहीं कर रहा है उसके लिए आपको 10 से 5 बच्चों को बहुत बेहतरीन तरीके से पढ़ाना होगा जिससे उनका भरोसा बिल्ड हो |



वह आपके बारे में और भी दोस्तों को बताएं अगर वह आपके बारे में दोस्तों को बताते हैं और अपने कुछ और दोस्तों को रिकमेंड करते हैं , देखते ही देखते आपका 1 साल के अंदर इंस्टीट्यूट(institute)  चलने की अवस्था में आ जाएगा |

पर याद रहे इंस्टिट्यूट बिल्डिंग (institute buulding) खोलते ही 2 से 3 महीने में सब्र  ना खोए |

अब बात करते इंस्टिट्यूट को स्टार्ट कैसे किया जाए | जिनके पास लागत कम है उनको बहुत धैर्य बहुत ध्यान से इंस्टिट्यूट खोलना चाहिए क्योंकि जितना ध्यान से आप चीजों को समझेंगे शुरू में , उतना ही आपके इंस्टिट्यूट आने वाले समय में उतने ही ज्यादा तेजी से प्रोग्रेस करेगा |

शुरू के 4 से 5 महीने आप focus  ना loose हो|


अक्सर देखा गया है जो इंस्टिट्यूट (institute) खोलते हैं जिनके पास धन अधिक है वह कुछ चीजों पर ध्यान नहीं देते उनको लगता है कि  सिर्फ इंस्ट्रूट खोल , दो टीचर रख लो , मार्केटिंग कर दो , इससे इंस्टिट्यूट उनका खूब चलने लगेगा but ऐसा होता नहीं है. |

इंस्टिट्यूट खोलने के लिए पहले आपको वहां की बच्चों की सबसे कॉमन प्रॉब्लम्स (common problem) और वह कॉमन टॉपिक्स (common topic)  आपको पहले से बताओ जो बच्चे पहले सीखना चाहते हैं , जिससे 2 से 3 महीने में उनको कुछ सीखने को मिले |

अच्छी एक्सरसाइज क्लासेस (exercise clases ).करवाओ |

पर डे क्लास शुरू होने से पहले जिससे उनको रिवाइज होता है | बच्चे इंस्टिट्यूट में पढ़ने आते हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि वह घर जाकर पढ़ते हैं वह सोचते हैं कि इंस्टिट्यूट में इतना सिखा देगा कि हमें पढ़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी |

कुछ इस तरह की हैबिट्स को बिल्ड करने के लिए आपको पर डे एक्सरसाइज ( per day exercise )  करवानी चाहिए जो आपने प्रीवियस डे (previous day ) में पढ़ाया हो|



अच्छे से एक्स्ट्रा classes  चाहिए , एक्स्ट्रा डाउट क्लीयरिंग clasees चाहिए उसके बाद धीरे-धीरे करके फिर आप उनके बारे में और समझेंगे अगर आप थोड़ा गलत जा रहे हो तो यहां आप को समझने का मौका मिलेगा |


स्टार्ट करने के लिए

पहले आपको एक जगह लेनी होगी |


कोशिश करें की जगह ( shared space)   हो यानी कुछ घंटों के लिए ही आप आपको उसका किराया देना पड़े तथा उसमें  उसमें बेसिक्स जैसे चेयर (chair), बोर्ड (board) , inverter , parking , toilet आदि पहले से हो


ऐसा कभी मत सोचे कि इंस्टिट्यूट चल जाएगा तो वह जगह मशहूर हो जाएगी ऐसा नहीं होता |  institute मशहूर होता है जगह कभी मशहूर नहीं होती |


अगर आपने नए-नए स्टार्ट किया और आपको जगह की जरूरत हो जिसमें आपको सब कुछ मिले तो आप हमें मैसेज (message) करके जरूर बताएं , हम आपके लिए वह जगह अवेलेबल (available ) करवा सकते आपके शहर में |
कई लोगों ने पूछा है कि हमारे पास जगह है , सब कुछ है कोई अगर institute  open करना चाहता तो उनके पास पार्टनरशिप (partnership) का प्लान है |



अगर आपके अपनी जगह है तो जगह थोड़ी बड़ी और सब बेसिक्स (basics) जैसे toilet व आदि पार्किंग (parking ) जैसी सुविधा भी आपके पास होती है बहुत अच्छी होगा |


इंस्टिट्यूट खोलने के बाद आपको कोर्स डिजाइन ( Course Design )  करना चाहिए कि किस दिन क्या कोर्स पढ़ाया जाएगा और किस दिन उस कोर्स को रिवाइज कराया जाएगा |
रिवाइज (Revise ) कराते रहना बहुत जरूरी है इससे  बच्चों का मन लगा रहता है |






कोर्स डिजाइन (course design)  से जुड़े किसी तरीके को समझना हो तो आप हमें मैसेज कर सकते हैं. |



Institutes  की मार्केटिंग की बात करें तो अक्सर देखा गया है कि लोग पेंपलेट (pemplates) बहुत बांटते हैं |

असल में पेंपलेट बहुत नॉर्मल है इसमें कोई फायदा नहीं क्योंकि आपके पास इतने पैसे नहीं है इसे आप बार बार  बांटे |

आपको बेहतर और टारगेट user रास्ता बनाना होगा |



एक रास्ता यह है कि आप कुछ बच्चों को प्रीवियस ईयर या कुछ सिलेक्टेड क्वेश्चंस का सेट फोटो कॉपी करा कर दे और उनसे उनके कांटेक्ट नंबर ले और उनको अपने बारे में बताएं |

दूसरा रास्ता है आप अपना ऑनलाइन प्रसेंस बनाएं कस्टमर को बार-बार अपने बारे में बताएं कि हम क्या कर रहे हैं जिससे वह आप पर इंटरेस्ट ले और आप तक reach करने की एक बार  सोचे |

ऑनलाइन presence बनाने के लिए हम आपकी मदद करते हैं , इसमें आपको ₹700 कॉस्ट (cost) लगती है इसमें आपके बारे में पेज में लिखा जाता है   , जिससे कस्टमर आप तक सर्च (search) करके पहुंचता है , साथी ही आप भी कस्टमर (customer) तक इसको शेयर कर सकते हैं - मोबाइल नंबर से या अन्य मीडियम  से l

साथी ही  हम आपके बारे में कई ग्रुपों में जिनमें लाखों से ऊपर बंदे हैं उन तक शेयर कर सकते हैं इसमें आपकी ₹300 लगते हैं |


आप अपने बारे में हमें और भी बता सकते हैं | उसके हिसाब से हम और भी आपको सजेस्ट कर सकते हैं |


जैसे आप कंपटीशन (competition)के बच्चों को टारगेट करना चाहते हैं इसका सबसे अच्छा तरीका है आप पहले उन बच्चों को थोड़ा समझें |
इसके लिए आप कुछ बुक्स की दुकानों में उनके आसपास उनको देखें और उनके बारे में जाने  उनसे पूछे कि आप क्या कर रहे हैं और कौन सा कोर्स कर रहे हैं. |


ऐसे आप 10 से 15 बच्चों से बात करें आपको उनके बारे में एक अनुमान लग जाएगा |

फिर उसके बाद आपको पता लग जाएगा कि किस तरह से मार्केटिंग करनी है , कोशिश करें कि 10 से 15 बच्चे ही आपके शुरुआती टारगेट में  हो |


अगर आपके टारगेट यूजर स्कूल के बच्चे हो तो उसके लिए आपको देखना होगा कि किस समय क्या चल रहा है और बहुत सिलेक्टेड सब्जेक्ट (selected subject ) के हिसाब से institute आपको खोलना चाहिए जैसे कि सिर्फ फिजिक्स (Physics)  पढ़ाने के लिए इंस्टिट्यूट या फिर सिर्फ मैथ (Maths) पढ़ाने के लिए इंस्टिट्यूट या फिर सिर्फ केमिस्ट्री (Chemistry) पढ़ाने के लिए इंस्टिट्यूट ,  उसी पर ही आपका पूरा फोकस (Focus) होना चाहिए या फिर इंग्लिश (english ) पढ़ाने के लिए इंस्टिट्यूट |

सब्जेक्ट (Subject ) के अनुसार आपको बताना पड़ेगा बच्चों को कि हम क्या पढ़ा रहे हैं और कैसे पढ़ा रहे हैं और उसका क्या फायदा है |

इसके लिए भी आपको कुछ बच्चों से continue engagment ) करते रहना होगा |
स्कूल के बच्चों को सिर्फ theory ही नहीं पढ़ाना चाहिए | कुछ छोटे-छोटे एग्जांपल्स (examples)  , छोटे-छोटे केसेस हमेशा उनको बताते रहना चाहिए जिससे वह अन्य दोस्तों से भी उस तरह की चीजें पूछें जिससे भी आपकी इंस्टिट्यूट की value बढ़ती है |


होम ट्यूशंस (home- tution) में भी काफी scope है पर,  परंतु यह कि घर-घर जाकर पढ़ाना यह ज्यादातर उतना सफल नहीं है जो सिर्फ और सिर्फ कोचिंग चलाना चाहते हैं इनके लिए उनको बेहतर तरीके ढूंढने होंगे पढ़ाने के जिससे लोग अपने बच्चों को उनके पास भेजें जैसे प्रैक्टिकल (practical)  पढ़ाना , पेरेंट्स (parents) को भी साथ में बुलाना आदि |

हां पर होम ट्यूशन एक अच्छा मार्केट (market ) जिस पर काम बहुत अच्छे से किया जा सकता है क्योंकि यह देखा गया है , जो टीचर्स (teacher) होम ट्यूशंस (home-tution) देते हैं वह ज्यादा दिन के बाद सीरियस (serious)  नहीं रहते यानी उनका इंटरेस्ट (interest ) खत्म हो जाता है , इसीलिए इसको भी इंस्टिट्यूट (institute) की तरह ही चलाना चाहिए |

आपको इंस्टिट्यूट खोलने के लिए अगर कभी जगह , फर्नीचर बोर्ड , आदि किसी की या फिर जगह के साथ जिन सभी चीजों की जरूरत पड़ती है तो आप हमें मैसेज करके बताएं हम आपको अगले  घंटों के हिसाब से करवा देंगे |

हमारे पास इंस्टिट्यूट के लिए अच्छी चेयर सप्लायर ( chair supplier ) है जोकि टूटती नहीं है और अथवा अन्य चीजें भी आपको सप्लाई कर सकते हैं , अच्छे दाम पर |






इंस्टिट्यूट (Institute) के बिजनेस में  प्रॉब्लम्स (problems)

पहला की बच्चों का कहना की फीस (fee) हम महीने के आखिर में देंगे पर आप यह याद रखें आप फीस के मामले में थोड़ा सा स्ट्रिक्ट (strict) रहे | आप बच्चों को बताया कि फीस (fees) आपको  2 दिन में ही देनी पड़ेगी |



अगर कोर्स (course) की वन टाइम fees है तो उसे आप पहले दिन ही हाफ फिश (half fees)  ले ले और बाकी के fees, within 15 days मे ले |


इसे टॉले नहीं , क्योंकि बच्चों उसके बाद उसमें फीस (fees) नहीं देते |

समय-समय पर अलग-अलग प्रकार के बच्चों को कोर्स के लिए आना उसके लिए आप कुछ दिनों के लिए नए बच्चों के लिए सेपरेट क्लास दें ताकि वह करंट क्लास में ना बैठे जिससे उनको आप पर ज्यादा भरोसा होगा |

बच्चों की छोटी से छोटी प्रॉब्लम आप उनको समझाएं क्योंकि वह आप पर ही निर्भर करते हैं जैसे कि देखा गया है बहुत बच्चों को बेसिक्स मैथ की भी नहीं पता होती ,  उसके लिए आप उनकी सेपरेट क्लास दे |


बहुत से बच्चे सिर्फ देखने आते हैं कि आप कैसे पढ़ाते हैं और वह कंटिन्यूज नहीं रहते उन पर अब ज्यादा ध्यान मत दे आप बस अपने पढ़ाने पर ध्यान दें उन्हें कुछ बोले नहीं |


कोर्स अगर आपका सही तरीके से डिजाइंड है कि पढ़ाना क्या है और उसके जो टॉपिक आप पढ़ाते हैं उससे जुड़े हुए क्वेश्चन आपको करवाने क्या-क्या है तो आप बच्चों में हमेशा इंटरेस्ट बना कर रख सकते हैं और वह इंस्टिट्यूट की सफलता के लिए बहुत जरूरी होता है |




अगर आपके institute में शुरुआती दिनों में बच्चे नहीं आ रहे हैं तो आप धैर्य खोए नहीं क्योंकि अब ध्यान दें कि वह क्यों नहीं आ रहे क्योंकि उसके कई सारे रीजन होते हैं है सिर्फ इंस्टिट्यूट की लोकेशन  नहीं होता | टाइम भी एक कारण होता है की उस टाइम पर बच्चे किस चीज की तैयारी कर रहे हैं क्या करना है क्योंकि अधिकतर वह कई सारी कोचिंग से जुड़े होते हैं

शुरू के एक दो महीने में अगर आप कम बच्चों से पढ़ाते हैं तो आपकी अच्छी प्रैक्टिस हो जाते हो इंस्टीट्यूट चलाने की ,  कोर्स को पढ़ाने की , कोर्स को डिजाइन करने की और समझने की इसलिए शुरुआत में कम बच्चे भी आपके लिए एक अच्छे प्रतीक है |

        

कोई बेसिक प्रॉब्लम (basic problem)जैसे कि ट्यूटर नहीं मिल रहा हो  , या फिर कोई सही property नहीं दे पा रहा हो या फिर आपको किसी पार्टनर की जरूरत हो आप हमें मैसेज करके बता सकते हम आपको उसके हिसाब से समाधान दे सकते हैं (message करके)
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अगर आप ट्विटर हैं तो कभी यह मत सोचें कि जगह भी मेरी इंस्टिट्यूट भी मेरा अब नहीं पड़ा लूंगा मैं सब कुछ देख लूंगा ऐसी गलती कभी ना करें आपका फोकस पढ़ाने में होना चाहिए और कोई और आपका पार्टनर बच्चों को फोकस लाने में मार्केटिंग करने में भी होना चाहिए क्योंकि समय के साथ बहुत चीज छूट खुलेंगे भी और बंद भी होंगे आप अपने आप को कितना बेहतर करते जाते हैं आपकी सक्सेस (success) पर निर्भर करता है |

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